ध्रुव: लेकिन विज्ञान तो भगवान को नहीं मानता।
नंदिनी: देखिये कभी कभी हमारा प्रश्न भी गलत हो जाता है चूँकि विज्ञानं कोई जिव नहीं है जो किसी को माने या नहीं माने, विज्ञानं एक खोज है जैसे:- ये क्या है, ये क्यों है, ये कैसे है? आदि। हाँ हमारा प्रश्न ऐसे हो सकता है की वैज्ञानिक भगवान को क्यों नहीं मानते?
और इसका जवाब ये हो सकता है -
की यह हमारे ज्ञान पर निर्भर करता है, क्युकी वैज्ञानिक अभी खोज करने में बहुत पीछे है, और जब तक आप अपनी खोज पूरी नहीं कर लेते तब तक ये निर्णय ले लेना की भगवान् नहीं है बिलकुल तर्कसंगत नहीं है।
उल्लू एक निशाचर पक्षी है जिसने कभी सूरज को देखा। उड़े लगता है सूरज नहीं है।
लेकिन सूरज तो आकाश में हमेशा मौजूद है। ठीक उसी तरह भगवान भी है, चाहे वैज्ञानिक उन्हें माने या न माने।
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